क्या अभी भी किसान एक राजनीतिक मुद्दा ही बनकर रह जाएंगे?

देश में कृषि विधेयक को लेकर हंगामा जारी है। देश का विपक्ष, किसान इस विधेयक को लेकर सड़कों पर है। हालांकि इतने हंगामे के बाद भी संसद में आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020, किसान उत्पादन व्यापार एवं वाणिज्य (प्रोत्साहन एवं सुविधा) विधेयक 2020 और किसान (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) मूल्य आश्वासन का समझौता एवं कृषि सेवा विधेयक 2020 को मंजूरी दे दी गई है। आखिर में राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह कानून का रूप ले लेगा। आपको बता दें कि पिछले रविवार को विधेयक के विरोध में संसद में हंगामा करने को लेकर तृणमूल कांग्रेस के सांसद सहित 10 विधायकों को निलंबित कर दिया गया है।

हंगामे के दौरान, विपक्षी पार्टी के सांसदों ने सदन में नारा लगाते हुए कहा कि ‘तानाशाही बंद करो’। विपक्षी सांसदों के हंगामे के चलते एक बार 10 मिनट के लिए राज्यसभा की कार्यवाही को स्थगित भी करना पड़ा था। बताया जा रहा है कि टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने उप सभापति के आसन के पास पहुंचकर रूल बुक फाड़ दिया और आरोप लगाया कि सदन की कार्यवाही नियमों के खिलाफ हुई है। हंगामा करते हुए विपक्षी सदस्य सदन की वेल में पहुंच गए और उप-सभापति का माइक छीनने की कोशिश की। विपक्षी सांसदों का कहना था कि विधेयक पर कार्यवाही के लिए विधेयकों को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए। विधेयक को किसान विरोधी बताते हुए केंद्रीय मंत्री और शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने 17 सितंबर की रात मोदी मंत्रिमंडल से इस्तीफा

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